संविधान संशोधन प्रक्रिया की पूरी जानकारी

संविधान क्या है और संविधान का क्या अर्थ होता है ? इसके बारे में हम पिछली पोस्ट में पूर्ण जानकारी दे चुके है। लेकिन आज की इस पोस्ट में हम आपको भारतीय संविधान संशोधन प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी देंगे। अभी हाल ही में सरकार द्वारा 127वां संविधान संशोधन विधेयक लाया गया है।


इस कारण संविधान संशोधन विधेयक क्या है और संविधान संसोधन कैसे होता है ? की जानकारी आपको अवश्य होनी चाहिए। इस पोस्ट में इसे बहुत ही सरल तरीके से समझाने की कोशिश की गयी है।

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संविधान संशोधन क्या है ? संविधान संशोधन का क्या अर्थ होता है ?


एक देश की बदली हुयी परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार यदि संविधान के नियमों और कानूनों में कोई बदलाव किया जाता है या नए नियम और कानून बनाये जाते है तो इस प्रक्रिया को संविधान संशोधन कहते है। संविधान संशोधन को इंग्लिश में Constitutional Amendment कहा जाता है।

भारतीय संविधान का संशोधन भारत के संविधान में परिवर्तन करने की प्रक्रिया है। इस तरह के परिवर्तन भारत की संसद के द्वारा किये जाते हैं।

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सरल शब्दों में कहा जाये तो संविधान के अनुच्छेदों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन या बदलाव करना,नये अनुच्छेद को संविधान में शामिल करना या किसी अनुच्छेद को हटाना आदि की प्रक्रिया संविधान संशोधन की प्रक्रिया में शामिल है।

भारतीय संविधान की यह विशेषता है कि,भारत का संविधान लचीला है। इसका मतलब की भारत के संविधान को संशोधित करके उसे नवीन परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार प्रभावी बनाया जा सकता है।

संविधान निर्माताओं को यह पता था की भविष्य में संविधान को संशोधित करने की जरूरत जरूर पड़ेगी इस कारण उन्होने पहले से ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन की पूर्ण प्रक्रिया का उल्लेख किया था। इस कारण भारतीय संविधान के भाग 20,अनुच्छेद 368 के अनुसार संविधान को संशोधित करने की प्रक्रिया का प्रावधान है।


संविधान संशोधित की प्रक्रिया कैसे होती है ? संविधान संशोधन इन हिंदी ? संविधान संशोधन कैसे होता है ?


भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन की दो प्रक्रियाओं का उल्लेख मिलता है। जो निम्न है -

1 - संसद के विशिष्ट बहुमत द्वारा संशोधन की प्रक्रिया
2 - संसद के विशिष्ट बहुमत और राज्य विधानमंडलों के अनुमोदन से संशोधन की प्रक्रिया

लेकिन संविधान संशोधन का एक तरीका और है जो निम्न है -

3 - संसद द्वारा सामान्य कानून निर्माण की प्रक्रिया के आधार पर संशोधन

इस प्रकार भारतीय संविधान को तीन तरीकों के द्वारा संशोधित किया जा सकता है। तो आइये अब तीनों तरीको के द्वारा संविधान संशोधन की प्रक्रिया को विस्तार से समझते है।


संसद द्वारा सामान्य कानून निर्माण की प्रक्रिया के आधार पर संशोधन


इस प्रक्रिया का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 368 में नहीं मिलता है लेकिन इसके द्वारा भी संविधान का संशोधन किया जा सकता है।

संविधान को संशोधित करने के प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों (राज्यसभा और लोकसभा ) में पृथक - पृथक रूप से पेश किया जाता है। दोनों सदनों से प्रस्ताव को बहुमत मिलने पर उस प्रस्ताव को पारित करके राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति के द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर संविधान संसोधन किया जा सकता है।

इस प्रकार की संविधान संशोधन की प्रक्रिया का इस्तेमाल तब किया जाता है,जब राज्यों के क्षेत्र,सीमा और नाम परिवर्तन,नागरिकता,अनुसूचित जातियों और जनजाति से संबन्धित व्यवस्था,संसदीय विशेषाधिकार,संसदीय गणपूर्ति तथा द्वितीय अनुसूची की कुछ व्यवस्था से संबन्धित संशोधन करना होता है।

संसद के विशिष्ट बहुमत द्वारा संशोधन की प्रक्रिया 


मूल अधिकार,नीति निदेशक तत्व तथा संविधान की अन्य सभी व्यवस्थाएं जो प्रथम और तृतीय श्रेणी में नहीं आती है,उन सब में संशोधन करने के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।

संविधान के संशोधन के विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तावित किया किया जाता है। यदि इस प्रस्ताव को सदन के कुल सदस्यों की संख्या के बहुमत तथा उपस्थित तथा मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाता है तो इस प्रस्ताव को संसद के दूसरे सदन में भेज दिया जाता है।

संसद के दूसरे सदन में भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यदि यह विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हो जाता है तो यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त करने के बाद संविधान का अंग बन जाता है।

संसद के विशिष्ट बहुमत और राज्य विधानमंडलों के अनुमोदन से संशोधन की प्रक्रिया 


यदि संविधान में दर्ज इन उपबन्धों से संबन्धित नियमों,क़ानूनों और व्यवस्थाओं में संशोधन करना है तो इस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। यह उपबन्ध निम्न है -

1 - राष्ट्रपति का निर्वाचन
2 - राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति
3 - संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
4 - संघीय क्षेत्रों के लिए उच्च न्यायालय
5 - राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
6 - संघीय नयायपालिका
7 - राज्यों में उच्च न्यायालय
8 - सातवीं अनुसूची में से कोई भी सूची
9 - संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व
10 - संघ तथा राज्यों में विधायी संबंध

संविधान के संशोधन के विधेयक को संसद के दोनों सदनों द्वारा पृथक-पृथक अपने कुल बहुमत तथा उपस्थित और मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होने के बाद उस विधेयक का राज्यों के कुल विधानमंडलों में से कम से कम आधे बहुमत द्वारा स्वीकृत होना चाहिए। फिर उस विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति मिलने पर उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर वह विधेयक भी संविधान का अंग बन जाता है।

इस प्रकार तीन तरीको के द्वारा संविधान संशोधन किया जा सकता है।

संविधान के 24वें संशोधन ( 1971 ) के अनुसार यदि कोई संविधान संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाये तो राष्ट्रपति को उस विधेयक पर अपनी मंजूरी देनी ही होगी। इसी कारण संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर एक औपचारिकता मात्र है।


भारत के संविधान में अब तक कुल कितनी बार संविधान संशोधन किया गया है ?


भारत में संविधान लागू होने के बाद हर वर्ष औसतन दो संविधान संशोधन किये जाते है। अब तक 127 बार भारतीय संविधान संशोधित किया जा चुका है।

Note - हमारे द्वारा पब्लिश की जाने वाली जानकारी में कुछ त्रुटियाँ संभव है,इस कारण इस लेख से प्राप्त जानकारी को किसी विषय विशेषज्ञ से प्रमाणित जरूर करवा ले।

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