राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव कैसे होता है ? पूरी जानकारी

जैसा कि हम जानते है,भारतीय संसद के दो सदन होते है। उच्च सदन के रूप में राज्यसभा होती है। राज्यसभा को राज्यों की परिषद कहा जाता है। लेकिन राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव कैसे होता है ? राज्यसभा की सीटों का गणित क्या है ? इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है।

लेकिन आज की इस पोस्ट में 'राज्यसभा के सीटों का गणित व राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव कैसे होता है' टॉपिक को बहुत ही सरल शब्दों में समझाया गया है ।

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राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया,आखिर कैसे राज्यसभा के सदस्य का चुनाव होता है ? राज्यसभा सांसद कैसे चुने जाते है ?


राज्यसभा संसद का स्थायी सदन होता है। राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 हो सकती है। वर्तमान में यह संख्या 245 है। इसमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते है।

भारतीय संविधान की अनुसूची चार के अनुसार, किस राज्य में राज्यसभा की कितनी सीटें होंगी ये उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की आबादी के आधार पर तय होगा। उदाहरण के लिए यदि उत्तर प्रदेश पर गौर किया जाये तो इसमें सबसे अधिक जनसंख्या निवास करती है। ऐसे में राज्यसभा में सबसे अधिक सीट उत्तरप्रदेश राज्य की होगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश के लिए 31 सीटें निर्धारित की गई हैं।


चूँकि राज्यसभा में आबादी के आधार पर हर एक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश की सीटों की संख्या निश्चित की जाती है,यही कारण है कि,गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम जैसे राज्यों में केवल एक-एक राज्यसभा सीटें हैं।

राज्यसभा की सभी सीटों के लिए या पूरी राज्यसभा का चुनाव कभी भी एक साथ नहीं होता है। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। लेकिन उनमें से एक-तिहाई सदस्य प्रति दो वर्ष पश्चात पद-निवृत हो जाते है। तथा एक तिहाई नवीन सदस्य पद ग्रहण करते है।

हर दो वर्ष बाद एक-तिहाई राज्यसभा के सदस्य पद से निवृत हो जाती है। और उनकी राज्यसभा सीट खाली हो जाती है। इन खाली हुयी एक-तिहाई राज्यसभा सीटों पर नए एक-तिहाई राज्यसभा सदस्य पद ग्रहण करते है।

राज्यसभा में सदस्य बनने के लिए आवश्यक योग्यता

  • वह भारत का नागरिक होना चाहिए। 
  • उसकी आयु तीस वर्ष से कम न हो। 
  • वह किसी लाभ के पद पर आसीन न हो। 
  • विकृत दिमाग का न हो। 
  • वह ऐसी अन्य योग्यताएं रखता हो जो संसद के किसी कानून द्वारा निश्चित की जाये। 

अब जैसा की ऊपर आपको जानकारी दी गयी है की राज्यसभा की सभी सीटों के लिए एक साथ चुनाव नहीं होते है। हर दो वर्ष बाद एक-तिहाई राज्यसभा सदस्य अपनी सीट छोड़ देते है। उन खाली हुयी सीटों पर नए सदस्यों को नियुक्त करने के लिए राज्यसभा चुनाव करवाये जाते है।


अब मान लीजिये की इस प्रकार किसी वर्ष राज्यसभा में 48 सीट खाली हो जाती है। अब इन 48 सीट पर चुनाव करवाया जायेगा। अब मान ले की इन 48 सीट में से 7 राज्यसभा सीट राजस्थान राज्य की है।

अब राजस्थान में 7 राज्यसभा सदस्यों का चुनाव करवाया जायेगा। राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में राज्य के विधानसभा के सदस्य ही भाग लेते है। जिनको हम विधायक ( MLA ) कहते है। राजस्थान में कुल विधायकों की संख्या 200 है।

अब यह 200 विधायक 7 राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में वोट डालेंगे। लेकिन विधायक राज्यसभा की हर सीट के लिए मतदान नहीं कर सकते है। वें केवल किसी एक सीट के लिए ही मतदान कर सकते है।

अब इन 7 राज्यसभा सीट के लिए हर एक राष्ट्रीय पार्टी अपना उम्मीदवार खड़ा करती है।

लेकिन कोई उम्मीदवार कैसे जीतेगा ? किसी उम्मीदवार को राज्यसभा सदस्य बनने के लिए कितने विधायकों का बहुमत चाहिए ? इसका निर्धारण एक फॉर्मूला के द्वारा किया जाता है। 


  • राजस्थान में राज्यसभा की सीट 7 है। अब 7 में एक जोड़े तो आयेगा 8 
  • राजस्थान में कुल विधायक है - 200 
  • अब 200 में से 8 को भाग दिया जायेगा। भाग देने पर भागफल आता है 25 
  • अब 25 में एक जोड़ने पर हमारे सामने संख्या आती है 26


इसका मतलब यह होता है कि, यदि राजस्थान में राज्यसभा की 7 सीट पर चुनाव होता है तो किसी एक पार्टी के उम्मीदवार को राज्यसभा सदस्य बनने के लिए 26 विधायकों का वोट चाहिए।


लेकिन मान लीजिये कि राजस्थान में 3 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होता तो -

  • 3 राज्यसभा सीट पर चुनाव हो रहा है तो तीन में एक जोड़ने पर आयेगा 4 
  • कुल विधायकों की संख्या है 200 
  • अब 200 में 4 का भाग दिया जायेगा। अब नतीजा आता है 50 
  • 50 में एक जोड़ने पर हमारे सामने संख्या आती है 51


इसका मतलब यह होता है कि, यदि राजस्थान में राज्यसभा की 3 सीट पर चुनाव होता है तो किसी एक पार्टी के उम्मीदवार को राज्यसभा सदस्य बनने के लिए 51 विधायकों का वोट चाहिए।


जरा गौर कीजिये -  विधायक किसी एक ही राज्यसभा सीट के लिए वोट दे सकता है। अब यदि एक सीट पर 4 उम्मीदवार हो तो विधायक को वोट देते वक़्त बताना होगा की उन चार उम्मीदवारों में से उसकी पहली,दूसरी,तीसरी,चौथी पसंद कौनसी है।

अब जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा विधायक पहली पसंद के रूप में वोट डालते है वह सदस्य जीत जाता है तथा उस राज्य के प्रतिनिधि के रूप में राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करता है।


तो इस प्रकार राज्यसभा सांसदों का चुनाव होता है। यही कारण है की राज्यसभा सदस्यों/सांसदों के चुनाव में हम मतदान नहीं करते है,जनता मतदान नहीं करती है। क्योकि यहाँ पर हमारे द्वारा चुने गये प्रतिनिधि जो विधायक होते है वो ही अपना वोट डालते है।

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