एसएसएलसी और मेट्रिक्युलेशन में अंतर [ Difference Between SSLC and Matriculation ]

आज की इस पोस्ट में मैं एसएसएलसी और मेट्रिक्युलेशन में क्या अंतर होता है ? टॉपिक पर पूरी जानकारी शेयर कर रहा हूं। अक्सर कई बार विद्यार्थी जब किसी नौकरी के लिए या उच्च शिक्षा के लिए कोई फॉर्म भरते है तो उस फॉर्म में शैक्षणिक योग्यता में SSLC या Matriculation का विकल्प होता है। 

लेकिन SSLC और Matriculation में क्या Difference होता है ? इसके बारे में जानकारी न होने के कारण कई बार हम फॉर्म में गलत विकल्प को भर देते है। इस कारण आपको एसएसएलसी और मेट्रिक्युलेशन में क्या अंतर होता है ? इस टॉपिक पर पूरी जानकारी जरूर होनी चाहिए। 

तो आइये इस पोस्ट में "Difference Between SSLC and Matriculation" टॉपिक पर पूरी जानकारी प्राप्त करते है। 

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Top Difference Between SSLC and Matriculation in Hindi [ एसएसएलसी और मेट्रिक्युलेशन में क्या अंतर होता है ?]

SSLC और Matriculation में अंतर को समझने से पहले आपको एसएसएलसी और मेट्रिक्युलेशन क्या होता है ? के बारे में पता होना चाहिए। आइये सबसे पहले एक - एक करके इन दोनों शब्दों के बारे में जान लेते है। 

SSLC क्या है ?

भारत के कई राज्यों, खासकर केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में स्टूडेंट्स को माध्यमिक स्तर की शिक्षा पूर्ण करने पर एसएसएलसी दिया जाता है। SSLC की Full Form है,Secondary School Leaving Certificate.

Secondary School Leaving Certificate को हिन्दी में 'माध्यमिक विद्यालय छोड़ने का प्रमाण पत्र' कहते है। इन राज्यों में कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों का SSLC Exam होता है,जो स्टूडेंट्स SSLC परीक्षा में पास हो जाते है उनको SSLC सर्टिफिकेट दिया जाता है। 

इन राज्यों में यदि किसी Student के पास SSLC है तो उससे इस बात का पता चल जाता है कि इस विद्यार्थी ने कक्षा 10 तक की शिक्षा पूर्ण की है।

इस कारण एसएसएलसी का मतलब है कि विद्यार्थी ने कक्षा 10वीं तक पढ़ाई की है। 

इस कारण यदि किसी फॉर्म में Education Qualification में SSLC का विकल्प दिया गया है तो उसका मतलब 10वीं कक्षा से होता है। 

Matriculation क्या है ?

भारत में अक्सर 10वीं कक्षा के लिए "Matric" शब्द का इस्तेमाल होता है। जो विद्यार्थी कक्षा 10वीं तक पढे है उनको Metric Pass कहा जाता है। Matric शब्द Matriculation का ही छोटा रूप है। 

Matriculation का हिन्दी में अर्थ होता है,माध्यमिक। 

इस कारण यदि कोई विद्यार्थी माध्यमिक स्तर ( कक्षा 10वीं ) की शिक्षा ग्रहण कर चुका है तो उसे मेट्रिक पास विद्यार्थी कहा जाता है। 

Matriculation का अर्थ भी कक्षा 10वीं तक शिक्षा ग्रहण करने से ही होता है। 

यदि आप किसी फॉर्म में शैक्षणिक योग्यता के विकल्प में Matriculation का विकल्प भरते है तो इसका मतलब है कि आप कक्षा 10वीं तक शिक्षा ग्रहण कर चुके है । 

एसएसएलसी और मेट्रिक्युलेशन में क्या मुख्य अंतर होता है ?

अब "Difference Between SSLC and Matriculation" टॉपिक के बारे में जानकारी प्राप्त करते है। 

SSLC और Matriculation में कोई भी Major Difference नहीं होता है। 

SSLC का भी मतलब कक्षा 10वीं तक शिक्षा ग्रहण करने से होता है। यदि कोई विद्यार्थी कक्षा 10वीं पास कर चुका है तो वह किसी भी फॉर्म में शैक्षणिक योग्यता के विकल्प के रूप में SSLC के विकल्प को भर सकता है। 

Matriculation शब्द का इस्तेमाल भी प्राय कक्षा 10वीं तक शिक्षा ग्रहण करने के लिए होता है। यदि कोई विद्यार्थी किसी फॉर्म में शैक्षणिक योग्यता के विकल्प के रूप में 'मेट्रिक्युलेशन' विकल्प भरता है तो उसका मतलब है की विद्यार्थी कक्षा 10वीं तक पढ़ा लिखा है। 

SSLC = Class 10th 

Matriculation = Class 10th 

इस कारण SSLC and Matriculation में कोई भी Difference नहीं होता है,इन दोनों शब्दों से आशय Class 10th ही होता है। भारत के कई राज्यों, खासकर केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में जो स्टूडेंट्स कक्षा 10वीं तक शिक्षा ग्रहण कर चुके है,उनके लिए SSLC शब्द का इस्तेमाल होता है जबकि दूसरे राज्यों में जो स्टूडेंट कक्षा 10वीं तक पढ़ चुके है उनके लिए Matric Pass शब्द प्रचलन में है। वास्तव में इन दोनों शब्दों में कोई भी अंतर नहीं है। 

इस कारण आप जब भी कोई फॉर्म भरते है तो यदि उसमें शैक्षणिक योग्यता के विकल्प के रूप में SSLC या Matriculation का विकल्प दिया गया है तो उसका मतलब 10वीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण करने से ही होता है। आपको कभी भी एसएसएलसी और मेट्रिक्युलेशन शब्दों में कन्फ्युज होने की जरूरत नहीं है। 

मैं उम्मीद करता हूं कि इस पोस्ट को पढ़कर आपको "SSLC और Matriculation के बीच Major Difference क्या होता है ?" टॉपिक पर पूरी जानकारी प्राप्त हो चुकी होगी। इस पोस्ट से जुड़े किसी भी प्रकार के सवाल पूछने के लिए आप कमेंट कर सकते है।

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