UPSC का फुल फॉर्म हिन्दी और इंग्लिश में,यूपीएससी क्या हैं ?

क्या आपने कभी सोचा हैं कि,जिले का कलेक्टर बनने के लिये कौनसी परीक्षा देनी पड़ती है,आखिरी पुलिस विभाग में डीएसपी बनने के लिये कौनसी परीक्षा देनी पड़ती हैं ? इन सभी उच्च पदों के लिये यूपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा देनी होती हैं। यूपीएससी की जानकारी बहुत कम लोगों को हैं। इस कारण आज की इस पोस्ट में हम यूपीएससी की फुल फॉर्म हिन्दी और इंग्लिश में क्या होती है ? UPSC Full Form in Hindi ? के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं।

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यूपीएससी का फुल फॉर्म क्या होता हैं ? USPC Full Form in Hindi


यूपीएससी का फुल फॉर्म हिन्दी में संघ लोक सेवा आयोग हैं। USPC का इंग्लिश में Full Form "UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION" होता हैं। भारत के नयी दिल्ली में स्थित यह आयोग भारतीय सिविल सेवा की भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता हैं। इस आयोग के द्वारा भारत में सिविल सेवाओं में योग्य उम्मीदवारों का चयन करने के लिये समय - समय पर भर्ती परीक्षा आयोजित करवाई जाती हैं। 

यूपीएससी के द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा,भारतीय पुलिस सेवा,भारतीय वन सेवा के साथ बीस प्रकार से अधिक सिविल सेवा के पदों पर भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जाता हैं। हर साल करीब आठ लाख उम्मीदवार इस भर्ती परीक्षा के लिये पंजीकरण करवाते हैं,लेकिन आठ लाख उम्मीदवारों में से केवल लगभग 1000 उम्मीदवारों का ही अंतिम रूप से चयन किया जाता हैं।

UPSC द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली सिविल सेवा भर्ती परीक्षा भारत की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा मानी जाती हैं। इस परीक्षा में एक पद के लिये लाखों उम्मीदवारों परीक्षा देते हैं। जो कैंडिडैट या स्टूडेंट्स भारतीय सिविल सेवा के विभिन्न पदों जैसे भारतीय पुलिस सेवा,प्रशासनिक सेवा आदि में उच्च पदों पर आसीन होना चाहते हैं वो इस भर्ती परीक्षा की तैयारी करते हैं।


UPSC क्या हैं ? यूपीएससी का गठन कब किया गया था ? यूपीएससी आयोग का इतिहास क्या हैं ?


यदि संघ लोक सेवा आयोग के इतिहास पर नजर डाली जाए तो इसका इतिहास भारत की आजादी से भी पहले का हैं। आइये इस पर एक नजर डालते हैं।

जब भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था तो उस वक़्त कंपनी के निर्देशकों द्वारा भारत में सिविल सेवा के लिये उम्मीदवारों का चयन किया जाता था। पहले उम्मीदवार को लंदन के हैलेबरी कॉलेज में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिये भेजा जाता था उसके बाद उस उम्मीदवार को इंडिया में कंपनी के सिविल सेवा प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया जाता था।

लेकिन फिर लॉर्ड मैकाले की ब्रिटिश संसद की चयन समिति की रिपोर्ट के बाद,भारत में योग्यता के आधार पर सिविल सेवा के लिये उम्मीदवारों का चयन करने के लिये एक सिविल सेवा आयोग का गठन 1854 में लंदन में किया गया। फिर सबसे पहले भारत में सिविल सेवाओं में भर्ती के लिये 1855 में भर्ती परीक्षा का आयोजन लंदन के इस आयोग में किया गया था।

उस भारत में भारत में Civil Services Join करने के लिये लंदन में परीक्षा का आयोजन किया जाता था। इस परीक्षा को पास करने पर उम्मीदवार को भारत में सिविल सेवा अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाता था। लेकिन इस परीक्षा का पाठ्यक्रम कुछ ऐसा था कि,जिसमें ब्रिटिश उम्मीदवारों को फायदा होता था।

लेकिन फिर भी 1864 में श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर के भाई श्री सत्येंद्रनाथ टैगोर ऐसे पहले भारतीय बने जो इस सिविल सेवा भर्ती परीक्षा में सफल हुये थे। उनके तीन साल बाद फिर एक साथ 4 अन्य भारतीय इस परीक्षा में सफल हुये थे। फिर भारतीय उम्मीदवारों द्वारा लगातार 50 वर्षों में यह माँग उठती रही कि इस भर्ती परीक्षा का आयोजन भारत में किया जाये।

फिर मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड इन सुधारों पर सहमत हुए थे। उसके बाद सन 1922 से भारतीय सिविल सेवा परीक्षा भारत में भी होने लगी थी। पहले इलाहाबाद में और बाद में दिल्ली में इस परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस दौरान ही भारत में संघीय लोक सेवा आयोग की स्थापना की गयी।


लेकिन अभी भी लंदन के Civil Service Commission द्वारा ही इन भर्ती परीक्षाओं का आयोजन किया जाता था। लेकिन फिर 1924 में ली आयोग द्वारा की गई मजबूत सिफारिशें के कारण भारत सरकार अधिनियम 1919 की धारा 96 (सी) के प्रावधानों को लागू करके 1 अक्टूबर, 1926 में भारत में लोक सेवा आयोग की स्थापना की गयी। स्थापना के वक़्त इस आयोग में चार सदस्य थे, सर रोस बार्कर इस आयोग के पहले अध्यक्ष थे।

फिर भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत 1अप्रैल 1937, को लोक सेवा आयोग संघीय लोक सेवा बन गया। भारत जब ब्रिटिश हकूमत से आजाद हो गया तो 26 जनवरी, 1950 को भारत के संविधान के उद्घाटन के साथ ही इस संघीय लोक सेवा आयोग को संघ लोक सेवा आयोग ( UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION ) के रूप में जाना जाने लगा। संविधान के अनुच्छेद 378 के खंड (1) के आधार पर इस आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को चुना गया।

यूपीएससी का क्या कार्य होता हैं ? UPSC Examination की जानकारी 


UPSC का कार्य भारत में Civil Services के लिये पूरे भारत में Examinations का आयोजन करवाना होता हैं। प्रतिवर्ष लगभग 20 प्रकार की भारतीय सिविल सेवा जैसे आईएएस,आईपीएस,आईएफ़एस जैसे पदों के लिये भर्ती परीक्षा का आयोजन होता हैं।

UPSC Examination की परीक्षा दो चरणों में होती हैं। पहली परीक्षा को UPSC Preliminary Exam के रूप में जाना जाता हैं। इस परीक्षा को पास करने पर ही उम्मीदवार को अगले चरण की परीक्षा में शामिल किया जाता हैं जिसे UPSC Mains Exam के नाम से जाना जाता हैं। जो उम्मीदवार UPSC Main Exam में पास हो जाते हैं उनको तीसरे चरण Interview Exam के लिये बुलाया जाता हैं।

यूपीएससी मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंको को जोड़कर एक मेरिट लिस्ट बनाई जाती हैं। उस मेरिट लिस्ट के अनुसार ही पदों की संख्या के हिसाब से सबसे योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाता हैं।

UPSC Exam Pattern,Syllabus क्या हैं ?


UPSC Preliminary Exam एक Objective Exam होता हैं। कटऑफ के अनुसार चुने गए उम्मीदवार को अगले चरण की परीक्षा UPSC Mains Exam के लिये Admit Card जारी किए जाते हैं। Main Exam Subjective प्रकार का होता हैं।

यूपीएससी मुख्य परीक्षा में अलग - अलग प्रकार के लिखित 9 पेपर होते हैं,जो अलग - अलग विषयों पर आधारित होते हैं। सभी पेपर के नंबर को जोड़कर एक मेरिट लिस्ट बनाई जाती है उसके बाद उम्मीदवारों को Interview के लिये बुलाया जाता हैं। इस प्रकार ही सिविल सेवा के लिये सबसे योग्य उम्मीदवारों का चयन होता हैं।

UPSC Exam Notification,Examination Pattern,Syllabus,Admit Card आदि के लिये आप संघ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।


UPSC परीक्षा की तैयारी करके आप IAS,IPS,IFS अधिकारी बन सकते हैं और बेहतर सरकारी नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। इस कारण आप इस परीक्षा की तैयारी जरूर करे और खुद का उज्ज्वल भविष्य बनाने का हर संभव प्रयास करे।

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